मध्यप्रदेश पर निबंध: जानिए ,मध्य प्रदेश के बारे में जानकारी .

इस पोस्ट में हम आपको मध्यप्रदेश पर निबंध के बारे में बताने जा रहें , यह एक संक्षिप्त निबंध है जिसे आप अपने स्कुल और छोटी कक्षाओं के बच्चों के लिए निबंध प्रतियोगिता में उपयोग कर सकते है.

मध्यप्रदेश पर निबंध

राज्य पुनर्गठन आयोग की अनुशंसा पर विचार करने के उपरान्त देश के राज्यों का पुनर्गठन किया गया। परिणामस्वरूप दिनांक 1 नवम्बर, 1956 को नया मध्यप्रदेश बना। इसका निर्माण महाकोशल (17 जिले), मध्यभारत (16 जिले), विन्ध्यप्रदेश (8 जिले), भोपाल राज्य (2 जिले) तथा राजस्थान के कोटा जिले के सिरोंज सब-डिवीजन के सम्मिलन से हुआ है। नए मध्यप्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पंडित रवि शंकर शुक्ल थे

दिनांक 1 नवम्बर 2000 को मध्यप्रदेश से एक नए राज्य-छत्तीसगढ़. का गठन किया गया। छत्तीसगढ़ में, मध्यप्रदेश की रायपुर, बस्तर और बिलासपुर संभागों के जिले शामिल किए गए थे।

वर्तमान में प्रदेश में 10 संभाग, 52 जिले है व प्रदेश का क्षेत्रफल 3,08,245 वर्ग किलोमीटर है। पहले यह देश का सबसे बड़ा राज्य था लेकिन वर्तमान मे क्षेत्रफल की दृष्टि में देश में यह द्वितीय स्थान पर है।

मध्यप्रदेश, भारत के केन्द्र में स्थित होने के कारण देश का हृदय स्थल कहलाता है। भूगर्भिक संरचनाकी दृष्टि से यह भारत का प्राचीनतम भूभाग है। हिमालय से भी पुराना यह भूखण्ड किसी समय उस संरचनाका हिस्सा था, जिसे गोंडवाना भूभाग कहा गया है।

मध्यप्रदेश का अनादिकाल से ही ऐतिहासिक महत्व रहा है। यहाँ नर्मदा घाटी के अंचल में अनेक सभ्यताएँ पुष्पित,पल्लवित हुई इस कारण यह क्षेत्र आज भी पुरातत्वएवं ऐतिहासिक अवशेषों के आकर्षण का केन्द्र है। विभिन्न कालखण्डों में इस भूभाग को अनेक नामों सेपुकारा व पहचाना गया है।

ऐतिहासिक और पौरणिक संदभों से गुंथे मध्यप्रदेश में अतीत की एक नहीं अनेकगौरवगाथाएँ हैं। प्राप्त प्रमाणों के आधार पर यहाँ भगवान राम ने अपने वनवास का कुछ समय बिताया एवंरामपथ गमन यहाँ होना माना जाता है। इसी प्रकार कृष्ण ने सांदीपनि ऋषि के आश्रम में शिक्षा पाई व पाण्डवों ने यहाँ अज्ञातवास गुजारा।

प्रकृति ने मध्यप्रदेश को बेतवा,नर्मदा,ताप्ती,चम्बल,क्षिप्रा जैसी जीवनदायनी नदियों का उपहार
दिया है। यहाँ की भूमि विंध्याचल सतपुड़ा की विशाल पर्वत श्रृंखलाओं एवं मनोरम वनों से आच्छादित हैं। यहाँ ग्वालियर, मांडू, नरवर, असीरगढ़, चंदेरी के किले प्राचीन स्थापत्य कला के अद्भुत नमूने हैं।

ओंकारेश्वर, महेश्वर, उज्जयिनी, अमरकंटक, पचमढ़ी, ओरछा ऐतिहासिक तथा धार्मिक स्थल के रूप में प्राचीन वैभव के प्रतीक हैं। यहाँ के पर्यटन स्थल सैलानियों को भी अपनी ओर आकर्षित करते हैं। मध्यप्रदेश में चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य, अशोक, राजाभोज, छत्रसाल, तात्याटोपे, अहिल्याबाई, अंवतीबाई, भीमानायक तथा चन्द्रशेखर आजाद आदि महापुरूषों का गौरवशाली इतिहास है।

कालीदास, बाणभट्ट. भर्तृहरि, जगनिक, ईसूरी, केशव व तानसेन ने अपने साहित्य एवं संगीत के योगदान से मध्यप्रदेश के गौरव को समृद्ध किया है। आदिमानव से लेकर 20वीं सदी तक यहाँ अनेक स्मारक, स्तूप, गुफाऐं, प्राचीन सिक्के शैलचित्र, किले आदि उपलब्ध हैं। जिनसे हम प्रदेश के प्राचीन वैभव को जान सकते हैं।

भीमबेटका की गुफाएँ, साँची के बौद्ध स्तूपं तथा खजुराहो के मंदिर विश्व धरोहर बन गए हैं, ये प्राचीन बेजान पत्थरों और ईंटों से निर्मित वस्तुएँ ही नहीं हैं, अपितु तत्कालीन स्थापत्यकला, इतिहास, संस्कृति और जनजीवन के ज्वलंत प्रमाण हैं।

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